Soil Testing जानकारी का अभाव कहें या कुछ और। किसान उर्वरकों का अंधाधुंध प्रयोग कर रहे हैं। जिसके फलस्वरूप मृदा में केमिकल रसायन की मात्रा बढ़ रही है। जो अधिक लागत का एक प्रमुख कारण भी है। इसके साथ ही मृदा स्वास्थ्य खराब हो रहा है। प्रकृति कीटों का विलय हो रहा है। पर्यावरण प्रदूषण में इजापा हो रहा है। मानव स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव देखने को मिलते हैं। एक स्वस्थ, उच्च उत्पादन फसल लेने के लिए मिट्टी में 16 पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। जिसमें किसान तीन पोषक तत्व मृदा को देता है नाइट्रोजन फास्फोरस और पोटाश। मृदा में इन सोलह पोषक तत्वों की आवश्यकता को पूरा करने से पहले उनकी कमी का स्तर जांचना चाहिए। जिसके लिए मिट्टी की जांच करना आवश्यक है। इससे किसान सही मात्रा में खाद डाल पाते हैं और प्राकृतिक रूप से फ़सल का उत्पादन बढ़ा पाते हैं। सही तरीके से मिट्टी की जाँच करने से खेती की लागत कम हो सकती है, फ़सल की पैदावार बढ़ सकती है, और लंबे समय तक मिट्टी की उर्वरता बनी रह सकती है। कई किसान बिना यह जाने खाद डाल देते हैं कि उनकी मिट्टी को असल में किस चीज़ की ज़रूरत है। इससे पोषक तत्वों का संतुलन बिगड़...
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