भारत के उत्तरी क्षेत्र में केरल के तटीय क्षेत्रों में चावल उगाने की एक विशिष्ट और सदियों पुरानी विधि को "कैपड़ खेती"(kaipad farming) कहा जाता है। यह पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ टिकाऊ कृषि का एक आकर्षक उदाहरण है। कैपड़ खेती भारत के केरल के तटीय क्षेत्रों में प्रचलित एक पारंपरिक और टिकाऊ कृषि तकनीक है। यह एकीकृत खेती का एक अनूठा रूप है। खासकर बैकवाटर और तटीय क्षेत्रों में और यह विशेष रूप से अपने पर्यावरण के अनुकूल दृष्टिकोण के लिए जाना जाता है। यह तकनीक प्राकृतिक ज्वार के प्रभाव का लाभ उठाते हुए जलीय कृषि (मछली और झींगा की खेती) और कृषि (फसलों की खेती) दोनों प्रकार की खेती करने की तकनीक है। काइपेड खेती क्या है? कैपड़ खेती(kaipad farming) एक पारंपरिक और टिकाऊ कृषि पद्धति है जो मुख्य रूप से भारत के केरल के तटीय क्षेत्रों में प्रचलित है। यह खेती की तकनीक अनोखी है क्योंकि इसमें कृषि और जलीय कृषि दोनों को सम्मलित किया जाता है। तटीय जल के ज्वारीय प्रभाव का उपयोग फसलों में मुख्य रूप से धान की खेती करने के लिए किया जाता है। साथ ही मछली या झींगा भी पाला जाता है। यह प्रक्रिया प्र...
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