पोषक तत्व प्रबंधन—जिसे विशेष रूप से 'एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन' (Integrated Nutrient Management) के रूप में परिभाषित किया जाता है—में फसलों को उचित अनुपात में खाद और उर्वरक देना शामिल है। सिंथेटिक (कृत्रिम) उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से कृषि की निरंतरता (सस्टेनेबिलिटी) में गिरावट आई है, क्योंकि खेती के लिए आवश्यक पोषक तत्वों की पर्याप्त भरपाई नहीं हो पा रही है। यह बात सभी प्रकार की फसलों पर लागू होती है, चाहे वे तिलहन हों, दालें हों, या कोई अन्य किस्म। आज अधिकांश किसानों ने हरी खाद और गोबर की खाद (फार्मयार्ड खाद) की जगह रासायनिक उर्वरकों का उपयोग शुरू कर दिया है। हालाँकि, यदि इन सभी साधनों के संयुक्त उपयोग वाला एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाया जाए, तो किसानों के खेत मज़बूत और टिकाऊ बने रहेंगे। इसके अलावा, मिट्टी अपनी उर्वरता बनाए रखेगी, जिससे फसलों की पैदावार अधिक होने की गारंटी मिलेगी। एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन (INM) एक स्मार्ट और संतुलित रणनीति है, जिसके द्वारा फसलों को वे सभी आवश्यक पोषक तत्व प्रदान किए जाते हैं जिनकी उन्हें पनपने, स्वस्थ रहने और अधिक पैदावार देने के लिए ज़रूरत होत...
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